Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi
दीपावली की शुभकामनाएं इन पंक्तियों के साथ मन में ज्ञान का दीप जलाकर , अंतर्मन से प्रश्न करें . हम ने कैसे कर्म किए हैं ? गर्व करें या शर्म करें? अंतर्मन ही न्यायधीश है, वो तो सच्ची बात कहेगा. इस दीवाली न्यायधीश की , बात सुनें और कर्म करें ....
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इस्मत ज़ैदी
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[15 Oct 2009 00:25 AM]



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