कविता

Ismat Zaidi महिला आरक्षण _____________________________ वह नहीं चाहती आरक्षण वह नहीं चाहती संरक्षण इस दौर की नारी सबला है ये मत सोचो वह अबला है नारी में अक्षुण शक्ति है बुद्धि है उसमें युक्ति है वह राजनीति हो ,शिक्षा हो या धर्म के क्षेत्र की दीक्षा हो विज्ञानं हो... [पूरी पोस्ट]
writer इस्मत ज़ैदी
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[18 Nov 2009 22:08 PM]

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