ek ghazal

Ismat Zaidi एक ग़ज़ल हाज़िरे ख़िदमत है | 'ग़ज़ल' मुनफ़रिद है वो ज़माने को बताया उसने क्या है हुब्बुलवतनी कर के दिखाया उसने वो ख़ुशी मिल गयी जिस का मुतमन्नी था दिल चंद रोते हुए बच्चों को हंसाया उसने दर्स ओ तदरीस ज़रूरी है तरक्क़ी के लिए जा के मजदूर के बच्चों को पढ़ाया... [पूरी पोस्ट]
writer इस्मत ज़ैदी
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[30 Nov 2009 11:45 AM]

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