ghazal
ग़ज़ल ________________________ आजकल मुल्क में बिकते तो हैं अख़बार बहुत कुछ ख़ुशी देते हैं कुछ देते हैं आज़ार बहुत ये अलग बात है इक फूल न खिल पाया वहां यूँ तो उगने लगे सहरा में भी अश्जार बहुत उम्र भर देता रहा कुछ न किसी से माँगा इस ग़रीबी में भी वो शख्स...
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इस्मत ज़ैदी
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[05 Dec 2009 13:53 PM]



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