गेरुआ: चार व्यंग्यचित्र
गेरुआ: चार व्यंग्यचित्र-------घनाक्षरी में..... आज तीसरा नौकरी में भूखा रहा, बिजनेस में नंगा रहा, अक्समात् बुद्धि आई, धार लिया गेरुआ. फिर तो ये जीवन का, दर्शन समझ लिया, विचार-व्यवहार में, उतार लिया गेरुआ. मेरी कामनाएं भला, मारता वो कैसे कहो, मेरी काम...
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योगेन्द्र मौदगिल
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[05 Dec 2009 11:29 AM]



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