गेरुआ: चार व्यंग्यचित्र

योगेंद्र मौदगिल गेरुआ: चार व्यंग्यचित्र-------घनाक्षरी में..... आज तीसरा नौकरी में भूखा रहा, बिजनेस में नंगा रहा, अक्समात् बुद्धि आई, धार लिया गेरुआ. फिर तो ये जीवन का, दर्शन समझ लिया, विचार-व्यवहार में, उतार लिया गेरुआ. मेरी कामनाएं भला, मारता वो कैसे कहो, मेरी काम... [पूरी पोस्ट]
writer योगेन्द्र मौदगिल
views
19
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
11
[05 Dec 2009 11:29 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix