सिगरेट भी पूरी नही जलती…
फ़ुर्सत निकाल कर ज़िंदगी से , जाओ कभी वापस बचपन , तुमको तुम मिल जाओ शायद … *** (2) याद है मुझे अब भी वो दिन , रो रही थी तुम शायद , भीगी पलकों से ठीक से दिखा नही … *** (3) रौशन करते जग को उमर भर , नील गगन के तारे , कहाँ जाते हैं ये टूट कर … *** (4) जी...
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अम्बरीश अम्बुज
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[05 Dec 2009 10:56 AM]



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