इसके लिये भी भूमिका लिखूँ.....?
छह दिसम्बर उन्नीस सौ ब्यानबे रेल में सवार होकर अतिथि आये बसों में चढ़कर अतिथि आये पैदल पैदल भी अतिथि आये कारों में बैठकर भी अतिथि आये बनाये गये तोरणद्वार बान्धे गये बन्दनवार पाँव पखारे गये खूब हुआ खूब हुआ परम्परा का निर्वाह जुलूस निकले जय जयकार हुई श...
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शरद कोकास
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[05 Dec 2009 10:55 AM]



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