मुरली तेरा मुरलीधर 37

अखिलं मधुरम् उसके संग संग मिट जाते सभी उदासी स्वर मधुकर फूल हॅंसी के नभ से भू पर झरते हैं झर झर निर्झर उसके नयन जलद कर देते प्राण दुपहरी को पावस टेर रहा है हृदयाह्लादिनि मुरली   तेरा    मुरलीधर।।201।। कौन तुला जिस पर तौलेगा उसका अपनापन मध... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu
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[05 Dec 2009 08:10 AM]

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