नया ज्ञानोदय का मीडिया विशेषांक
कालिया जी के दफ्तर में बैठे बैठे एक रोज इस अंक की नींव पड़ी। मैंने बातों बातों में कहा कि ये सच है कि टीवी न्यूज इंडस्ट्री में सब कुछ सार्थक नहीं हो रहा है- पर पिछले कुछ सालों में कई खबरों ने समाज के सरोकार को ध्यान में रखा है। आज कोई भी नेता अधिकारी...
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शिवेंद्र
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[05 Dec 2009 07:40 AM]



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