बस यूं ही
कह कर निकल जाना हमेशा मुश्किल रहा मेरे लिए रिश्ते नाते को गणित के सवालों की तरह कभी नहीं सुलझाया मैने दूसरों के लिए हमेशा ज्यादा संभावनाएं छोड़ी चुप रहा क्योंकि ठेस पहुंचाने से डरता था झेलता रहा ताकि दूसरे की उम्मीद टूटने ना पाए खुद को नासमझ मानकर दू...
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सुबोध
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[05 Dec 2009 00:26 AM]



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