एक नारी की कविता
मेरी कविता सायास नहीं बनायी जाती भर जाता है जब मन का प्याला लबालब भावों और विचारों से तो निकल पड़ती है अनायास यूँ ही पानी के कुदरती सोते की तरह और मैं रहने देती हूँ उसे वैसे ही बिना काटे बिना छाँटे मेरी कविता अनगढ़ है गाँव की पगडंडी के किनारे पड़े अन...
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mukti
बादल
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[04 Dec 2009 13:53 PM]



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