अवधी उपन्यास - क़ासिद (4)
स्कूल कि यूनीफॉर्म पहिरे तमाम लरिकवा स्कूल कि तरफ दौरत जा रहे। राह म साइकिल वाले ऐसी वैसी बचिकै निकरि रहे कि कौनो लरिकवा चोटा ना जाए। बाज़ार क्यार दुकानदार अपनी अपनी दुकानदारी म मसरुफ हुइगै हैं। बाज़ार म लोगन कि आवाजाही बढ़न लागि है। टिल्लू इन पंचन क...
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पंकज शुक्ल
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[04 Dec 2009 11:36 AM]



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