अनुभूति और संवेदना को जागृत करती कविताएं

sahityakash अशोक प्रियरंजन गोविंद रस्तौगी की कविताएं मौजूदा समाज में पनप रही अपसंस्कृति, सामाजिक मूल्यों के क्षरण, भ्रष्टाचार, पतनशील राजनीति, जीवन में पनप रही निराशा, अकेलेपन, ऊब और भटकाव से साक्षात्कार कराती हैं । उनकी कविताओं में प्रखर आध्यात्मिक चेतना और गंभ... [पूरी पोस्ट]
writer dr ashok kumar mishra
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[04 Dec 2009 11:28 AM]

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