ब्लॉगिंग से संबंधित कुछ ग़लतफ़हमियाँ

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति हमारे एक मित्र थे बिल्कुल लखनऊ की नज़ाकत और नफ़ासत लिए हुए. वो अक्सर एक ज़ुमला इस्तेमाल किया करते थे " ये शरीफ़ हैं, इनकी शराफ़त की तो..." अब डैश-डैश पर मत जाइए. उसमें बहुत कुछ छिपा है, अजी मानिए कि बहुत कुछ छुपा रहता है इस डैश-डैश में. मसलन... अजी ग... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कान्त :
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[04 Dec 2009 06:40 AM]

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