कुछ पता चला बापजी और भैनजी का?
कल मेरे दफ्तर की एक सुंदर-सी कन्या संवाददाता को इस बात से बड़ी कोफ्त हुई कि कुछ मनचले लड़के, जो रास्ते चलती लड़कियों को छेड़ रहे थे, उन पर फब्तियां कस रहे थे, वे मनचले लड़के उन्हें देखते ही बोले, “ यार तो आंटी हैं। “ ... और ये कहकर ल़ड़के आगे बढ़ गए।...
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Pankaj Parashar
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[04 Dec 2009 05:51 AM]



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