ग़ालिब : दरिया और क़तरा
क़तरा और दरिया की उपमा एवं रूपक द्वारा जीव एवं ब्रह्म के ऐक्य की बात फ़ारसी एवं उर्दू में न जाने कब से कहते आ रहे हैं. दरिया में मिलते ही क़तरा खो जाता है, उसका निजत्व विलीन हो जाता है. क़तरा स्वंय दरिया हो जाता है. पर यह भी तो है कि दरिया भी कतरे मे...
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अनिल कान्त :
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[04 Dec 2009 04:21 AM]



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