जूत्यार्पण नहीं, माल्यार्पण के हैं हक़दार!
सड़क किनारे जिस रेहड़ी वाले से मैं सब्ज़ी खरीद रहा हूं, वहीं अचानक एक पुलिसवाला आकर रुकता है। वो इशारे से सब्ज़ीवाले को साइड में बुलाता है। वापिस आने पर जब मैं सब्जीवाले से बुलाने की वजह पूछता हूं, तो वो पहले कुछ हिचकिचाता है। फिर कहता है कि यहां खड़...
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नीरज बधवार
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[04 Dec 2009 02:28 AM]



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