झील वाली कहानी
पहले तो वह उसे चोरी से देखता रहा. सावधानी से. ऐसे जैसे उसकी देह को उसके नजरों की छुअन महसूस ही ना हो. फिर धीरे धीरे ढीठ सा हो गया. अब वह सामने पड़ी झील में चीड़ों की परछाई नहीं देख रहा था. वो सुंदर थी. ढलते सूरज की चमक उसके कंधे से झूल रही थी. जनवरी की...
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विकास कुमार
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[03 Dec 2009 16:54 PM]



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