सुन मेरे बंधू रे, सुन मेरे मितवा, सुन मेरे साथी रे

दिलीप के दिल से सचिन्द्र देव बर्मन, ये नाम मेरी पिछली पोस्ट पर चमक रहा था. अब भी मेरे मन में घुला घुला सा, गुनगुनाया सा नाच रहा है. कुछ भी लिख दूं, उनके लिये अधूरा सा लगता है. और तो और, जब उनकी धुनों पर रचे गये गीत जब मैं गुनगुनाता हूं, तो वे खुद मुझमें परकाया प्रवे... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप कवठेकर

दिलीप के दिल से

views
32
upvote
7
downvote
0
rating
7
comments
10
[03 Dec 2009 14:54 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix