तुम्हारी प्रतिक्षा में
मैं नहीं कहता कि तुम्हारे लिये ले आऊँगा तोड़कर चाँद तारे । मैं नहीं कहता कि तुम्हारे लिये बना दूँगा पहाड़ को धूल और झुका दूँगा आसमान को जमीन पर । मैं तो बस ला पाऊँगा तुम्हारे लिये ओस में लिपटे धूल से सने डाली से गिरे कुछ फूल जिनमें अभी भी बांकी है सुगं...
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चंदन कुमार झा
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[03 Dec 2009 14:15 PM]



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