फिर घर में कभी रामायण का पाठ नहीं हुआ
हमारे घर में परंपरा थी कि बड़े भैया के जन्मदिन (1 दिसंबर) को अखंड रामायण का पाठ होता था। 1984 में भी एक दिसंबर को रामायण शुरू हुई और 2 दिसंबर की रात को समापन के बाद पूरा परिवार गहरी नींद में सोया था। सुबह-सुबह कुछ पड़ोसियों ने तेज दरवाजा खटखटा कर उठा...
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satish aliya
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[03 Dec 2009 12:22 PM]



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