कविता - हमारा सोचना चन्द लमहों में फिज़ूल हो गया - प्रमोद ताम्बट

व्यंग्यलोक सोचा था, रासायनिक युद्ध का यह परीक्षण उन्हें बहुत महंगा पडे़गा भोपाल, उठ खड़ा होगा और लडे़गा हमारा सोचना चन्द लमहों में फिजूल हो गया जब सारा शहर मुआवजा और अन्तरिम राहत में खो गया। सोचा था, मेहनतकशों के साथ साम्राज्यवाद का यह षड़यंत्र उन्हें बहुत महंगा... [पूरी पोस्ट]
writer प्रमोद ताम्बट
views
19
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
10
[03 Dec 2009 10:55 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix