दरिंदा साथी : एक पारिवारिक घटना

समुत्कर्ष इतने वर्षों के बाद , मन के जद्दोजहद और जिम्मेदारियों के बीच यह कभी मन में आया ही नहीं था कि विश्वास इस हद तक टूट सकता है। कोई अपना ही जान का प्यासा हो सकता है। लेकिन अभी भी जब आंखे खुलती है तो अपने उस पुराने साथी की याद आती ; जिसने मुझे दुनिया दिखाई।... [पूरी पोस्ट]
writer समुत्कर्ष

भ्रष्टाचार

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[03 Dec 2009 10:33 AM]

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