कुछ भी तो नहीं पता....
ऐसा लगता ही नहीं कि जिंदगी से रंग उड़ गए हैं.....कभी कभी काली-सफेद उदासियों के बीच से सतरंगी हसरतों ने तमाम दबाब के बावजूद अपने हक़ की छाप छोड़ी है..... हां कई दफा..... ज़िद... तौहीन... ज़िल्लत...कसमसाहट....कुछ नहीं बल्कि सब कुछ जुड़ने से पहले ही टूट...
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tanu sharma.joshi
तुम...
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[03 Dec 2009 10:27 AM]



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