मेरी पहली हास्य भोजपुरी कविता:-आइए आप सब का मुलाकात कराते हैं, सुबह के भूले एक तिवारी जी से
अउर तिवारी कईसन हो, बहुत दिनों के बाद मिले हो, लागत हो दूबराय गये हो, अब का करने को आए हो, धरम-करम सब खाय गये हो, अम्मा बाबू जब बीमार थे, खबर नही तब लेने आए, गुजर गये जब उ दूनो तब, अब किसको का देने आए, नेचर तनिको ना बदला है, एकदम पहिले ज़ईसन हो, अउर...
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विनोद कुमार पांडेय
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[03 Dec 2009 09:40 AM]



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