आओ मिस काल करके ही देखें उसे.

डॉ.सुभाष भदौरिया.अहमदाबाद. ग़ज़ल वो न आया दुबारा शहर दोस्तो. लग गई उसको किसकी नज़र दोस्तो. आओ मिस काल कर के ही देखें उसे, हो रही उसकी कैसे गुज़र दोस्तो. उसको पिंज़ड़े में रहना गवारा न था, कट गये उसमें ही उसके पर दोस्तो. धूप में रह के जो छांव देता रहा, मिल के काटा सभी ने शज़र द... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.सुभाष भदौरिया.
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[03 Dec 2009 06:52 AM]

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