भोपाल मेरी जान !
मेरे भोपाल बस एक बार मुझको कह दे तू वो एक रात भला कब तक तुझ पर बीतेगी ? कब तलक आँख के आंसू तुझे भिगोएँगे कब तलक तख्तियों पर रंज कहे जायेंगे कब तलक दिल्ली की बेदिली सहेगा तू कब तलक शाम के धुंधलके तुझे डरायेंगे सुन ए भोपाल , मेरी जान ,मेरे साथी सुन क्य...
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आवेश
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[03 Dec 2009 03:36 AM]



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