जो मार खा रोईं नहीं

वैतागवाड़ी विष्णु खरे की कविता ‘जो मार खा रोईं नहीं’ का एक ख़याल-पाठ हिंदी कविता के पारंपरिक काव्‍य-आस्‍वादन-पठन-अभिरुचियों की रूढ़ता को विष्‍णु खरे की कविता जिस तरह-जितनी बार-जितने तरीक़ों से तोड़ती है, उनकी कविता के बारे में उतने ही रूढ़ शब्‍द-क्रम में बात की... [पूरी पोस्ट]
writer Geet Chaturvedi
views
22
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
3
[03 Dec 2009 03:21 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix