" हट जा ताऊ पाच्छे नै दारू पिवण दे जी भर के नै"

एक लोहार की यो ले  भाई,बात या थी के जित भी जाओ उत ताऊओ की ही चर्चा हो री सै,  मन्ने भी सोच्या साँझ का टैम सै जरा थोड़ी देर कनाट प्लेस के चक्कर काट आऊं, रीगल-रिवोली कने थोड़ी देर आंख भी सेक ल्यांगे और एकाध ओल्ड मंक का अद्धा भी ले ल्यांगे, आज जाड़ा घणा हो... [पूरी पोस्ट]
writer ललित शर्मा

फौजी ताऊ

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[03 Dec 2009 02:50 AM]

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