दोहा

अंतर्द्वंद का आइना वचन गुरु पिता के हैं, लगते बड़े कठोर। निज स्वारथ साधन हेतु, पकडे रहते डोर॥ काली-काली भैंस को, देख मुझे कुछ होय। रंग-भेद के कारण न, गौ माता कहलाय॥ उतने कदम बढाइये, जितनी जरुरत होय। जंगल सागर ना बचे, धरती मरू बन जाय॥ रामराज की चाह में, जनता हुई शहीद। र... [पूरी पोस्ट]
writer knkayastha
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[03 Dec 2009 02:11 AM]

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