काश वो कुहरा ही होता ..............!!
साथियों यह कविता मैंने विगत वर्ष लिखी थी लेकिन आज गैस काण्ड की २५ वी बरसी पर आपके बीच मैं रख रहा हूँ | वो भ्रम ही तो था उस धुंध को चंद तो कुहरा ही समझ बैठे थे पर वह कुहरा नहीं था वह तो जिन्दगी और मौत के बीच की धुंध थी काश वो कुहरा ही होता ..............
[पूरी पोस्ट]
प्रशांत दुबे
21
0
0
0
3
[03 Dec 2009 01:27 AM]



Shuffle








