मैं तुम बिन अधूरी हूं

Awaz Do Hum Ko मुसलसल ख़्वाब आते हैं सूरज अपना सफर तय करके अपने घर आराम करने जा रहा है कोई पागल , दीवानी बाल खोले, नन्गे क़दम, दीवानावार तपती रेत पर सरपट भाग रही है दुपट्टा उसके सर से होता हुआ कांधे पर आ कर लटक गया है उसकी बालियां कानों में झूला झूल रही है उसके हों... [पूरी पोस्ट]
writer Razi Shahab
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[03 Dec 2009 01:25 AM]

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