रुख्सर
मेरे जीने के लिये एक आसरा दर्करर था, दुनिया गम देती गयी मेरी गुज़र होती गयी । जल्वे मचल गये तो सेहर का गुमा हुआ , ज़ुल्फे बिखर गयी तो सैअह रात हो गयी । हमें आपनो के सितम याद आये, जब भी गरोन की इनायत देखी । तमस सी भरी ज़िन्दगी में , उमीद की रोशनी देखी।...
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gargi gupta
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[03 Dec 2009 00:41 AM]



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