बेजुबानों पर कहर का भी प्रचार
क ई दिन से उद्वेलित थी, परेशान थी। बकरीद के अगले दिन सुबह उठी तो समाचार पत्र में ऊंट की बलि की खबर देख ली। उद्वेलित इसलिये थी कि कुछ लोग कैसे सार्वजनिक रूप से एक जीव की हत्या कर सकते हैं? एक आदमी को मार डालना जेल भिजवा सकता है, हत्यारे को फांसी हो सक...
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Uttama
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[02 Dec 2009 23:28 PM]



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