कविता : हमारा सोचना चन्द लमहों में फिजूल हो गया

व्यंग्य कविता : हमारा सोचना चन्द लमहों में फिजूल हो गया प्रमोद ताम्बट सोचा था, रासायनिक युद्ध का यह परीक्षण उन्हें बहुत महंगा पडे़गा भोपाल, उठ खड़ा होगा और लडे़गा हमारा सोचना चन्द लमहों में फिजूल हो गया जब सारा शहर मुआवजा और अन्तरिम राहत में खो गया। सोचा था, ... [पूरी पोस्ट]
writer vyangya
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[02 Dec 2009 22:54 PM]

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