गीत रागिनी आ गाती है

गीत कलश स्वप्न तुम्हारे हो जाते हैं जब आकर पलकों में बन्दी तब संभव है कहाँ दूसरा चित्र नयन में बनने पाये नाम तुम्हारा ढल जाता है जब हर अक्षर के सांचे में तब फिर गीत दूसरा कैसे फिर मेरा पागल मन गाये ओ परिभाषित तुमसे ही तो सब सन्दर्भ जुड़े हैं मेरे मेरे चे... [पूरी पोस्ट]
writer राकेश खंडेलवाल
views
20
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
3
[02 Dec 2009 21:23 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix