ज्ञान जी का प्रस्ताव और धन!

सारथी मेरे कल के आलेख प्राचीन भारत में आर्थिक विषमता नहीं थी! पर टिपियाते समय ज्ञानदत्त जी ने एक आश्चर्यजनक बात कह दी जो इस प्रकार है: मनुष्य समान बन नहीं सकता। पूंजी को आप समान बांट भी दें तो वह कालान्तर में पुन: वही असमान बंट जायेगी।  [ज्ञानदत्त पाण... [पूरी पोस्ट]
writer Shastri JC Philip

विश्लेषण

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[02 Dec 2009 19:55 PM]

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