पचास गुलाब की खुशबू उसे काँटों सहित याद आएगी ...

काहे को ब्याहे बिदेस.... घर वालों के साथ, गत्ते के तीन फीट ऊँचे डिब्बे में बंद, पचास लाल गुलाब भी बेसब्री से उसका इंतज़ार कर रहे थे.. घर में घुसते ही वह गाड़ी कि चाबी और पर्स टेबल पर फेंक डिब्बा खोलने बैठ गई ...उसने उन्हे डिब्बे से  बाहर निकाला, पानी से भरी... [पूरी पोस्ट]
writer neera
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[02 Dec 2009 19:21 PM]

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