आज ही जन्मे थे आज ही जायेंगे...!

कुनाल (सिफर) आदाब आज एक ताज़ा ग़ज़ल अपनी जानिब से बहर-ए-मुतदारिक सालिम मे आपकी नज़र कर रहा हूँ.. मुआफी का तलबगार भी हूँ उन दोस्तों से जिनके दिल को ज़रा भी ठेस पहुंचे.. क्यूंकि आज मेरे जन्मदिन पे मुझे ऐसा लिखना नहीं चाहिए था...जो जिस तरह से दिल मे आया लिख दिय... [पूरी पोस्ट]
writer Kunaal
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[02 Dec 2009 17:51 PM]

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