हुनर मुझमैं नहीं……….

लम्हें जिन्दगी के चेहरे बदलने का हुनर मुझमैं नहीं , दर्द दिल में हो तो हसँने का हुनर मुझमें नहीं, मैं तो आईना हुँ तुझसे तुझ जैसी ही मैं बात करू, टूट कर सँवरने का हुनर मुझमैं नहीं । चलते चलते थम जाने का हुनर मुझमैं नहीं, एक बार मिल के छोड जाने का हुनर मुझमैं नहीं , मैं... [पूरी पोस्ट]
writer hemjyotsana "Deep"
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[02 Mar 2007 01:40 AM]

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