वरदान प्रकृति का
सख्ती,कठोरता,वरदान प्रकृति का,
हर्षित हो अंगीकार कर ।
दृढ़ , अचल चरित्र देगी तुझे ,
क्रमबद्ध ढंग से यह सजकर ।
जैसे बनती हैं भव्य अट्टालिकाएं,
जुड़कर पत्थरों में पत्थर।...
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संगीता पुरी
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[02 Dec 2007 08:21 AM]



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