अनुभूति

अनुभूति कलश हर अनुभूति परिभाषा के पथ पर बढे- यह आवश्यक नहीं, शब्दों की भी होती है एक सीमा, कभी-कभी साथ वे देते नहीं, इसलिए बार -बार मिलने व कहने पर, यही लगता है जो कहना था, कहां कहा? ‘प्रेम’ ऐसी ही इक ‘अनुभूति’ है, वह मोहताज नहीं रिश्तों... [पूरी पोस्ट]
writer ramadwivedi
views
13
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[01 Nov 2006 22:02 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix