“माया” श्रृंखला -२ ( कुछ मुक्तक)
१- भक्तों के माया-दान से, वेंकटेश भी परेशान हैं। आठो पहर रहते खड़े, अभिनय भी उनका महान है॥ २- सरकार की नज़रों से हरदम, ‘कर’ छुपा लेते हो तुम। किन्तु अपने पाप धोने को, मुझपर चढ़ा देते हो तुम॥ ३- माया की अनुमति के बिना, आशीष मेरा पा सको ना। [....
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ramadwivedi
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[02 Jun 2007 02:01 AM]



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