हिंदी में नहीं रहा ……

अनहद नाद सुंदर चंद ठाकुर की एक कविता हिंदी में हिंदी में नहीं रहा शब्द से रोटी मांगने का रिवाज शब्द यहां भूख है दीवानगी है कैद भी और निर्वाण भी शब्द हाशिए पर लड़ाई है जो लड़ी जाती है अंतहीन युद्ध की तरह और याद रहे आपकी शहादत पर न आंसू बहाए जाते हैं न तालियां बज... [पूरी पोस्ट]
writer PRIYANKAR

कविताएं/Poemsसुंदरचंद ठाकुर

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[02 Apr 2007 11:08 AM]

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