…मेरी पोस्ट के अर्थ अनेकों हैं

फुरसतिया सुबह-सुबह बच्चे को स्कूल  के लिये बस तक छोड़ने गया था। देखा तो सूरज भाई साहब गोल-गोल टिकिया से खुले में खिले थे। सोचा कि मोबाइल लाये होते तो एक तो फ़ोटॊ खैंच लेते और सटा देते यहां ब्लाग में। फ़ोटो और साथ में कविता भी सटा देते  एक ठो कोई जिसमें... [पूरी पोस्ट]
writer फ़ुरसतिया

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[02 Dec 2009 13:05 PM]

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