अवधी उपन्यास - क़ासिद (दूसरी कड़ी)
खान चाचा के घर ते आवै वाले आलाप केरि आवाज़ पूरे मोहल्ला म गूंजि रही है। तबहिनै पांडे अखबार वाले दादी की छत पर अखबार फ्याकत हैं। दादी क्यार घरु ऐस है कि एहि कि छत तेरे आयशा केरे घर का आंगन साफ दिखाई परति है। पिछले महिना भै रामायण के टाइम लगावा गा तूल...
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पंकज शुक्ल
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[02 Dec 2009 11:37 AM]



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