अब प्रयोगों से ही पैदा, हो रहा है आदमी
आदमी औरत का संगम, दशकों पुरानी बात है | अब प्रयोगों से भी, पैदा हो रहा है आदमी | जोडियाँ बनती हैं ऊपर, वर्षों पुरानी बात है | आज कल तो मर रहा है, आदमी पर आदमी | मूर्खता कह लो इसे, या प्रेम कि पराकास्ठा | भौतिक सुखों कि चाह ले, दुनियाँ...
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Tapashwani Anand
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[02 Dec 2009 08:01 AM]



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