ग़ालिब के कुछ शेर
थी ख़बर गर्म उनके आने की, आज ही घर में बोरिया न हुआ । * बोरिया = (ख़जूर की) चटाई 2. क्यों जल गया न ताबे-रुख़े-यार देखकर, जलता हूँ अपनी ताक़ते-दीदार देखकर । 3. हम वहाँ हैं जहाँ से हमको भी, कुछ हमारी ख़बर नहीं आती । 4. इशरते-क़तरा है दरिया में फ़ना हो...
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अनिल कान्त :
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[02 Dec 2009 04:21 AM]



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