मैं हूँ एक परिन्दा
मैंने देखा कि मैं हूँ एक परिन्दा जल थल है मेरे क़दमों में और पँखों में सिमटा नभ है नन्हीं नन्हीं मेरी उड़ानें दिखता सारा जग है मिल जुल कर सब साथी उड़ते कोई बन्धन कहीं नहीं है मैं उड़ता सागर की लहरों के ऊपर आसमान की बाहों में हर बार पलट आता हूँ धरती के...
[पूरी पोस्ट]
शारदा अरोरा
21
0
0
0
2
[02 Dec 2009 03:21 AM]



Shuffle








