शाम को सोने के, पहले पिता हुँ कि,

Words from my Soul शाम को सोने के, पहले पिता हुँ कि, भूल सकू दिन कि उठाई गई तकलीफो को जिससे मिला शाम का भोजन भूल सकू बेवजह कि गलियों को, जिसका हक़दार मैं नहीं भूल सकू मेह्न्ताना कि कमी को जिसका हक़दार मैं हुँ भूल सकू सर पर छत नहीं भूल सकू बचा स्कुल जाना चाहता है भुल सक... [पूरी पोस्ट]
writer "Azad Sikander"
views
22
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
1
[02 Dec 2009 02:17 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix